सेवा निवृत होने के बाद मैं अपने ज्येष्ठ पुत्र के पास दिल्ली में रह रहा हूँ। कल मैं सब्जी लेकर वापस आ रहा था। मैंने एक रिक्शा से बात की कि वो हमारे फ्लैट तक का कितना लेगा। उसने पचास रूपये मांगे वैसे तो ये लोग तीस तक लेते हैं। मैंने भी ओके कर दिया और रिक्शे पर बैठ गए।
मैंने उससे कहा ये बिहार को नेताओं ने बर्बाद कर रखा है। ये सही ना। आपने ये मुझसे क्यों कहा उसने मुझसे पूछा। आप कैसे जाने कि मैं बिहार का हूँ ? मैंने कहा मैं भी बिहार का हूँ और तुम लोगों के देखकर तरस आती है कि बिहारी बच्चे दिल्ली में रिक्शा चलाते हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है. ये नेता ही हैं जिनकी ये जिम्मेदारी थी कीटने रोजगार के अबसर पैदा किये जाएँ की बच्चों को बाहर जाना नहीं पड़े।
उसने कुछ जवाब नहीं दिया। मैंने फिर पूछा तुम तो पड़े लिखे लगते हो पढाई क्यों पूरी नहीं की। उसने रुंधे हुए लहजे में कहा " sorry sir, I am a graduate from Patna University in Political science and preparing for competitive exam for last three years. As I do not want to be burdon on my poor family, I doing it as part time job.
इस समय तक़ हम अपने आधे किलो मीटर दूर घर पहुँच चुके थे। मैंने उसे १०० रुपये दिए पर उसने नहीं लिए। उसने ४० रुपये काटकर वापस कर दिए और विद्युत् गति से वापस हो गया।
मैं अक्सर बिहार के लड़कों को दिल्ली के मुखर्जी नगर के पास दिल्ली विश्वविद्यालय के पार्क आदि में बच्चों को मिहनत करते देखा है ऑलमोस्ट सभी बच्चे कोई न कोई काम करते हैं पर सभी निराश हैं। इसमे ज्यादा तर अपर कास्ट के ही हैं।
ये अत्यंत दुर्भग्यपूर्ण है कि वहां के नेता लोग अभी भी जातिबाद आधारित राजनीति करते हैं। अपने को गरीबों दबे कुचले का मसीहा बताते हैं और अपना उल्लू सीधा करते हैं।
मैंने उससे कहा ये बिहार को नेताओं ने बर्बाद कर रखा है। ये सही ना। आपने ये मुझसे क्यों कहा उसने मुझसे पूछा। आप कैसे जाने कि मैं बिहार का हूँ ? मैंने कहा मैं भी बिहार का हूँ और तुम लोगों के देखकर तरस आती है कि बिहारी बच्चे दिल्ली में रिक्शा चलाते हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है. ये नेता ही हैं जिनकी ये जिम्मेदारी थी कीटने रोजगार के अबसर पैदा किये जाएँ की बच्चों को बाहर जाना नहीं पड़े।
उसने कुछ जवाब नहीं दिया। मैंने फिर पूछा तुम तो पड़े लिखे लगते हो पढाई क्यों पूरी नहीं की। उसने रुंधे हुए लहजे में कहा " sorry sir, I am a graduate from Patna University in Political science and preparing for competitive exam for last three years. As I do not want to be burdon on my poor family, I doing it as part time job.
इस समय तक़ हम अपने आधे किलो मीटर दूर घर पहुँच चुके थे। मैंने उसे १०० रुपये दिए पर उसने नहीं लिए। उसने ४० रुपये काटकर वापस कर दिए और विद्युत् गति से वापस हो गया।
मैं अक्सर बिहार के लड़कों को दिल्ली के मुखर्जी नगर के पास दिल्ली विश्वविद्यालय के पार्क आदि में बच्चों को मिहनत करते देखा है ऑलमोस्ट सभी बच्चे कोई न कोई काम करते हैं पर सभी निराश हैं। इसमे ज्यादा तर अपर कास्ट के ही हैं।
ये अत्यंत दुर्भग्यपूर्ण है कि वहां के नेता लोग अभी भी जातिबाद आधारित राजनीति करते हैं। अपने को गरीबों दबे कुचले का मसीहा बताते हैं और अपना उल्लू सीधा करते हैं।